vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 6: भीष्म पर्व
»
अध्याय 50: युधिष्ठिरकी चिन्ता, भगवान् श्रीकृष्णद्वारा आश्वासन, धृष्टद्युम्नका उत्साह तथा द्वितीय दिनके युद्धके लिये क्रौंचारुणव्यूहका निर्माण
»
श्लोक 22
श्लोक
6.50.22
कृष्ण भीष्म: सुसंरब्ध: सहित: सर्वपार्थिवै:।
क्षपयिष्यति नो नूनं यादृशोऽस्य पराक्रम:॥ २२॥
अनुवाद
हे कृष्ण! क्रोध में भरे हुए भीष्म अपने पक्ष के समस्त राजाओं सहित हम लोगों का विनाश अवश्य करेंगे। उनका पराक्रम इसी बात का संकेत देता है॥ 22॥
Lord Krishna! Bhishma, filled with anger, along with all the kings of his side, will certainly destroy us. His prowess indicates this.॥ 22॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas