श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 50: युधिष्ठिरकी चिन्ता, भगवान‍् श्रीकृष्णद्वारा आश्वासन, धृष्टद्युम्नका उत्साह तथा द्वितीय दिनके युद्धके लिये क्रौंचारुणव्यूहका निर्माण  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  6.50.21 
दिव्यान्यस्त्राणि भीष्मस्य द्रोणस्य च महात्मन:।
धक्ष्यन्ति क्षत्रियान् सर्वान् प्रयुक्तानि पुन: पुन:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
‘महान् भीष्म और द्रोण के दिव्यास्त्रों का प्रयोग बार-बार करके समस्त क्षत्रियों को भस्म कर दिया जाएगा।॥ 21॥
 
‘The divine weapons of the great Bhishma and Drona will be used again and again to reduce all the Kshatriyas to ashes.॥ 21॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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