श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 50: युधिष्ठिरकी चिन्ता, भगवान‍् श्रीकृष्णद्वारा आश्वासन, धृष्टद्युम्नका उत्साह तथा द्वितीय दिनके युद्धके लिये क्रौंचारुणव्यूहका निर्माण  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  6.50.20 
एकोऽस्त्रवित् सखा तेऽयं सोऽप्यस्मान् समुपेक्षते।
निर्दह्यमानान् भीष्मेण द्रोणेन च महात्मना॥ २०॥
 
 
अनुवाद
केवल तुम्हारा यह मित्र अर्जुन ही दिव्यास्त्रों को जानता है, किन्तु वह भीष्म और द्रोण के द्वारा जलाये जाने पर भी हमारी उपेक्षा कर रहा है।
 
Only this friend of yours, Arjun, knows the divine weapons, but even he, despite being burnt by the great Bhishma and Drona, is ignoring us.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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