श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 50: युधिष्ठिरकी चिन्ता, भगवान‍् श्रीकृष्णद्वारा आश्वासन, धृष्टद्युम्नका उत्साह तथा द्वितीय दिनके युद्धके लिये क्रौंचारुणव्यूहका निर्माण  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  6.50.19 
नालमेष क्षयं कर्तुं परसैन्यस्य मारिष।
आर्जवेनैव युद्धेन वीर वर्षशतैरपि॥ १९॥
 
 
अनुवाद
हे वीर श्रीकृष्ण! यदि युद्ध इतनी सरलता से लड़ा जाए तो यह भीमसेन अकेला ही सौ वर्षों में भी शत्रु सेना का नाश नहीं कर सकेगा।
 
Respected brave Sri Krishna! If the war is fought with such simplicity then this Bhimasena alone will not be able to destroy the enemy army even in a hundred years.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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