श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 50: युधिष्ठिरकी चिन्ता, भगवान‍् श्रीकृष्णद्वारा आश्वासन, धृष्टद्युम्नका उत्साह तथा द्वितीय दिनके युद्धके लिये क्रौंचारुणव्यूहका निर्माण  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  6.50.18 
गदया वीरघातिन्या यथोत्साहं महामना:।
करोत्यसुकरं कर्म रथाश्वनरदन्तिषु॥ १८॥
 
 
अनुवाद
महाबली भीमसेन रथ, घोड़े, मनुष्य और हाथियों पर अपनी घातक गदा से उत्साहपूर्वक अपना भयंकर पराक्रम दिखा रहे हैं॥18॥
 
‘The great Bhimasena is enthusiastically displaying his formidable prowess with his deadly mace against chariots, horses, men and elephants.॥ 18॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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