श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 50: युधिष्ठिरकी चिन्ता, भगवान‍् श्रीकृष्णद्वारा आश्वासन, धृष्टद्युम्नका उत्साह तथा द्वितीय दिनके युद्धके लिये क्रौंचारुणव्यूहका निर्माण  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  6.50.17 
एको भीम: परं शक्त्या युध्यत्येव महाभुज:।
केवलं बाहुवीर्येण क्षत्रधर्ममनुस्मरन्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
केवल महाबली भीमसेन ही क्षत्रिय धर्म का विचार करके केवल अपने बाहुबल पर ही निर्भर रहकर युद्ध कर रहे हैं॥17॥
 
Only the mighty Bhimasena, thinking about the duty of a Kshatriya, is fighting the war relying solely on his physical strength.॥ 17॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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