श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 50: युधिष्ठिरकी चिन्ता, भगवान‍् श्रीकृष्णद्वारा आश्वासन, धृष्टद्युम्नका उत्साह तथा द्वितीय दिनके युद्धके लिये क्रौंचारुणव्यूहका निर्माण  »  श्लोक 10-11
 
 
श्लोक  6.50.10-11 
क्षपयिष्यति सेनां मे कृष्ण भीष्मो महास्त्रवित्॥ १०॥
यथानलं प्रज्वलितं पतङ्गा: समभिद्रुता:।
विनाशायोपगच्छन्ति तथा मे सैनिको जन:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
श्रीकृष्ण! भीष्म महान दिव्यास्त्रों के स्वामी हैं। वे मेरी समस्त सेना का नाश कर देंगे। जैसे पतंगे जलती हुई अग्नि में कूदकर मर जाते हैं, वैसे ही मेरे सभी सैनिक भीष्म के पास जाकर नष्ट होने के लिए ही जाते हैं॥ 10-11॥
 
Sri Krishna! Bhishma is a master of great divine weapons. He will destroy my entire army. Just like moths jump into a burning fire to die, similarly all my soldiers go near Bhishma only to get destroyed.॥ 10-11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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