तेषां क्रोधं चिन्तयंस्तु अह:सु च निशासु च।
न शान्तिमधिगच्छामि दुर्योधनकृतेन हि।
कथं चाभून्महायुद्धं सर्वमाचक्ष्व संजय॥ २१॥
अनुवाद
दुर्योधन के कारण पाण्डवों के हृदय में जो क्रोध उत्पन्न हुआ है, उसे सोचकर मुझे न दिन में चैन मिलता है, न रात्रि में। संजय! मुझे बताओ कि वह महान् युद्ध किस प्रकार हुआ॥ 21॥
Thinking about the anger in the hearts of the Pandavas because of Duryodhana, I get no peace either during the day or at night. Sanjaya! Tell me how that great war took place.॥ 21॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥