श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 48: श्वेतका महाभयंकर पराक्रम और भीष्मके द्वारा उसका वध  »  श्लोक 96-98h
 
 
श्लोक  6.48.96-98h 
एतस्मिन्नन्तरे भीष्म: शुश्राव विपुलां गिरम्॥ ९६॥
आकाशादीरितां दिव्यामात्मनो हितसम्भवाम्।
भीष्म भीष्म महाबाहो शीघ्रं यत्नं कुरुष्व वै॥ ९७॥
एष ह्यस्य जये कालो निर्दिष्टो विश्वयोनिना।
 
 
अनुवाद
इतने में ही भीष्म को आकाश से अपने हित से सम्बन्धित एक दिव्य एवं गम्भीर वाणी सुनाई दी - 'महाबाहु भीष्म! शीघ्र प्रयत्न करो। ब्रह्माजी ने इस श्वेत शत्रु पर विजय पाने के लिए यही समय निश्चित किया है।' 96-97 1/2॥
 
In the meantime, Bhishma heard a divine and serious voice from the sky related to his interest - 'Mahabahu Bhishma! Try quickly. Lord Brahma has fixed this time to conquer this white enemy. 96-97 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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