| श्री महाभारत » पर्व 6: भीष्म पर्व » अध्याय 48: श्वेतका महाभयंकर पराक्रम और भीष्मके द्वारा उसका वध » श्लोक 80-81 |
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| | | | श्लोक 6.48.80-81  | तत: शक्तिं रणे श्वेतो जग्राहोग्रां महाभयाम्॥ ८०॥
कालदण्डोपमां घोरां मृत्योर्जिह्वामिव श्वसन्।
अब्रवीच्च तदा श्वेतो भीष्मं शान्तनवं रणे॥ ८१॥ | | | | | | अनुवाद | | श्वेत ने उस शक्ति को हाथ में लिया, जो अत्यन्त भयंकर, अत्यन्त भयंकर, मृत्युदण्ड के समान घोर और मृत्यु की जिह्वा के समान प्रतीत होती थी और गहरी साँस लेते हुए उसने युद्धस्थल में शान्तनुपुत्र भीष्म से कहा- ॥80-81॥ | | | | Shweta took that power in his hand, which was very fierce, very dangerous, as severe as the punishment of death and seemed like the tongue of death, and while taking a deep breath, he said to Shantanu's son Bhishma in the battlefield - ॥ 80-81॥ | | ✨ ai-generated | | |
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