| श्री महाभारत » पर्व 6: भीष्म पर्व » अध्याय 48: श्वेतका महाभयंकर पराक्रम और भीष्मके द्वारा उसका वध » श्लोक 73-74h |
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| | | | श्लोक 6.48.73-74h  | श्वेतं प्रति महाराज व्यसृजत् सायकान् बहून्।
तानावार्य रणे श्वेतो भीष्मस्य रथिनां वर:॥ ७३॥
धनुश्चिच्छेद भल्लेन पुनरेव पितुस्तव। | | | | | | अनुवाद | | महाराज! उसने श्वेत पर बहुत से बाणों की वर्षा की, किन्तु रथियों में श्रेष्ठ श्वेत ने रणभूमि में उन सब बाणों को निष्फल करके पुनः भाले से आपके पितामह भीष्म के धनुष को काट डाला। | | | | Maharaj! He showered many arrows on Shweta, but Shweta, the best among charioteers, after defeating all those arrows in the battlefield, again cut off the bow of your father Bhishma with a spear. 73 1/2. | | ✨ ai-generated | | |
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