श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 48: श्वेतका महाभयंकर पराक्रम और भीष्मके द्वारा उसका वध  »  श्लोक 2-5h
 
 
श्लोक  6.48.2-5h 
संजय उवाच
राजन् शतसहस्राणि तत: क्षत्रियपुङ्गवा:॥ २॥
श्वेतं सेनापतिं शूरं पुरस्कृत्य महारथा:।
राज्ञो बलं दर्शयन्तस्तव पुत्रस्य भारत॥ ३॥
शिखण्डिनं पुरस्कृत्य त्रातुमैच्छन्महारथा:।
अभ्यवर्तन्त भीष्मस्य रथं हेमपरिष्कृतम्॥ ४॥
जिघांसन्तं युधां श्रेष्ठं तदाऽऽसीत् तुमुलं महत्।
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं— हे राजन! पाण्डव पक्ष के लाखों क्षत्रिय महारथी विराट सेनापति श्वेत के नेतृत्व में आपके पुत्र दुर्योधन को अपना पराक्रम दिखाते हुए और शिखण्डी को आगे रखकर भीष्म के स्वर्ण-सज्जित रथ पर चढ़ गए। भारत! वे महारथी श्वेत उनकी रक्षा करना चाहते थे। अतः उन्होंने योद्धाओं में श्रेष्ठ भीष्म को मार डालने की इच्छा से उन पर आक्रमण किया। उस समय बड़ा भयंकर युद्ध छिड़ गया।
 
Sanjaya says— O King! Lakhs of Kshatriyas from the Pandava side, leading the mighty Maharathi Virat Senapati Swet, showed their might to your son Duryodhan and keeping Shikhandi in front, boarded Bhishma's golden decorated chariot. Bhaarat! Those Maharathi Swet wanted to protect him. Therefore, they attacked Bhishma, the best of the warriors, with the desire to kill him. A very fierce battle broke out at that time.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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