श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 48: श्वेतका महाभयंकर पराक्रम और भीष्मके द्वारा उसका वध  »  श्लोक 18-19
 
 
श्लोक  6.48.18-19 
युध्यमानस्य संग्रामे व्यूढे रजसि चोत्थिते॥ १८॥
धनु: कूजितविज्ञानं तत्रासीत् प्रतियुद्धॺत:।
गात्रस्पर्शेन योधानां व्यज्ञास्त परिपन्थिनम्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
उस युद्ध में इतनी धूल उड़ रही थी कि कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था । केवल धनुष की टंकार से ही पता चल रहा था कि विरोधी युद्ध कर रहा है । अनेक योद्धा तो उसके शरीर को छूकर ही जान लेते थे कि दूसरा योद्धा शत्रु सेना का है ॥18-19॥
 
So much dust flew in that battle that nothing could be seen. It was only by the twang of the bow that it was known that the opponent was fighting. Many warriors could understand that the other warrior was from the enemy army only by touching his body.॥ 18-19॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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