श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 48: श्वेतका महाभयंकर पराक्रम और भीष्मके द्वारा उसका वध  »  श्लोक 109-111h
 
 
श्लोक  6.48.109-111h 
सात्यकिं च शतेनाजौ भरतानां पितामह:॥ १०९॥
धृष्टद्युम्नं च विंशत्या कैकेयं चापि पञ्चभि:।
तांश्च सर्वान् महेष्वासान् पिता देवव्रतस्तव॥ ११०॥
वारयित्वा शरैर्घोरै: श्वेतमेवाभिदुद्रुवे।
 
 
अनुवाद
भरतवंशियों में पितामह ने युद्धस्थल में सात्यकि को सौ बाणों से, धृष्टद्युम्न को बीस बाणों से तथा केकयराज को पाँच बाणों से घायल कर दिया। इस प्रकार तुम्हारे पितामह भीष्म ने अपने भयंकर बाणों से उन समस्त महाधनुर्धरों को वहीं रोक दिया और पुनः श्वेत पर आक्रमण किया।
 
That great grandfather of the Bharatas wounded Satyaki with a hundred arrows, Dhrishtadyumna with twenty arrows and the prince of Kekaya with five arrows on the battlefield. In this way, your father Bhishma stopped all those great archers on the spot with his fierce arrows and again attacked Shweta.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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