Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 6.46.30-31h: वीरों की भुजाओं से प्रक्षेपित शुद्ध शक्ति मनुष्यों, घोड़ों और यहाँ तक कि लोहे के कवचों को भी भेदकर भूमि पर गिरती थी। हे प्रजानाथ! वहाँ गिरते समय वह भयंकर शक्तियाँ विशाल उल्काओं के समान प्रकट होती थीं।   |   mahabharat अध्याय 6.46: कौरव-पाण्डव-सेनाका घमासान युद्ध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 46: कौरव-पाण्डव-सेनाका घमासान युद्ध  »  श्लोक 30-31h
 
 
श्लोक  6.46.30-31h 
नराश्वकायान् निर्भिद्य लौहानि कवचानि च।
निपेतुर्विमला: शक्त्यो वीरबाहुभिरर्पिता:॥ ३०॥
महोल्काप्रतिमा घोरास्तत्र तत्र विशाम्पते।
 
 
अनुवाद
वीरों की भुजाओं से प्रक्षेपित शुद्ध शक्ति मनुष्यों, घोड़ों और यहाँ तक कि लोहे के कवचों को भी भेदकर भूमि पर गिरती थी। हे प्रजानाथ! वहाँ गिरते समय वह भयंकर शक्तियाँ विशाल उल्काओं के समान प्रकट होती थीं।
 
The pure energy shot by the arms of the heroes would fall on the ground after piercing the bodies of men and horses and even iron armours. O Prajanath! While falling there those dreadful energy appeared like huge meteors.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)