Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.41.5-6: जो लोग अहंकार और अहंकार से ग्रस्त होकर शास्त्रविरुद्ध कठोर तप और व्रत करते हैं, जो काम और आसक्ति से प्रेरित होते हैं, जो मूर्ख हैं तथा जो शरीर के भौतिक तत्त्वों के साथ-साथ शरीर में स्थित परमात्मा को भी हानि पहुँचाते हैं, वे राक्षस कहलाते हैं। | mahabharat अध्याय 6.41: श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 17: श्रद्धा के विभाग । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अशास्त्रविहितं घोरं तप्यन्ते ये तपो जना: ।
दम्भाहङ्कारसंयुक्ता: कामरागबलान्विता: ॥ ५ ॥
कर्षयन्त: शरीरस्थं भूतग्राममचेतस: ।
मां चैवान्त: शरीरस्थं तान्विद्ध्यासुरनिश्चयान् ॥ ६ ॥
अनुवाद
जो लोग अहंकार और अहंकार से ग्रस्त होकर शास्त्रविरुद्ध कठोर तप और व्रत करते हैं, जो काम और आसक्ति से प्रेरित होते हैं, जो मूर्ख हैं तथा जो शरीर के भौतिक तत्त्वों के साथ-साथ शरीर में स्थित परमात्मा को भी हानि पहुँचाते हैं, वे राक्षस कहलाते हैं।
Those who, overcome with arrogance and ego, perform severe austerities and vows that are against the scriptures, who are motivated by lust and attachment, who are foolish, and who cause harm to the physical elements of the body as well as the Supreme Being within the body, are called demons.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥