Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 6.39.20: हे अनघ! यह वैदिक शास्त्रों का अत्यन्त गोपनीय भाग है, जिसे मैंने अब प्रकट किया है। जो इसे समझ लेगा, वह ज्ञानी हो जाएगा और उसके प्रयत्न सफल होंगे।   |   mahabharat अध्याय 6.39: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 15: पुरुषोत्तम योग   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 39: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 15: पुरुषोत्तम योग  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  6.39.20 
इति गुह्यतमं शास्त्रमिदमुक्तं मयानघ ।
एतद्‍बुद्ध्वा बुद्धिमान्स्यात्कृतकृत्यश्च भारत ॥ २० ॥
 
 
अनुवाद
हे अनघ! यह वैदिक शास्त्रों का अत्यन्त गोपनीय भाग है, जिसे मैंने अब प्रकट किया है। जो इसे समझ लेगा, वह ज्ञानी हो जाएगा और उसके प्रयत्न सफल होंगे।
 
O Anagha! This is the most secret portion of the Vedic scriptures, which I have now revealed. Whoever understands this will become wise and his endeavors will be successful.
 
इति श्रीमहाभारते भीष्मपर्वणि श्रीमद्भगवद्‍गीतापर्वणि श्रीमद्भगवद्‍गीतासूपनिषत्सु ब्रह्मविद्यायां योगशास्त्रे श्रीकृष्णार्जुनसंवादे पुरुषोत्तमयोगो नाम पञ्चदशोऽध्याय:॥ १५॥ भीष्मपर्वणि तु एकोनचत्वारिंशोऽध्याय:॥ ३९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत भीष्मपर्वके श्रीमद्भगवद्‍गीतापर्वके अन्तर्गत ब्रह्मविद्या एवं योगशास्त्ररूप श्रीमद्भगवद्‍गीतोपनिषद्, श्रीकृष्णार्जुनसंवादमें पुरुषोत्तमयोग नामक पंद्रहवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १५॥ भीष्मपर्वमें उनतालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ३९॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)