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mahabharat 6.39.16: जीव दो प्रकार के होते हैं- पतित और अच्युत। भौतिक जगत में प्रत्येक जीव पतित (क्षर) है और आध्यात्मिक जगत में प्रत्येक जीव अच्युत (अक्षर) कहलाता है।   |   mahabharat अध्याय 6.39: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 15: पुरुषोत्तम योग   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.39.16 
द्वाविमौ पुरुषौ लोके क्षरश्चाक्षर एव च ।
क्षर: सर्वाणि भूतानि कूटस्थोऽक्षर उच्यते ॥ १६ ॥
 
 
अनुवाद
जीव दो प्रकार के होते हैं- पतित और अच्युत। भौतिक जगत में प्रत्येक जीव पतित (क्षर) है और आध्यात्मिक जगत में प्रत्येक जीव अच्युत (अक्षर) कहलाता है।
 
There are two types of living beings-fallen and infallible. In the physical world, every living being is fallen (Kshar) and in the spiritual world, every living being is called Achut (Akshar).
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)