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mahabharat 6.39.13: मैं प्रत्येक लोक में प्रवेश करता हूँ और मेरी शक्ति से सभी लोक अपनी कक्षा में स्थित रहते हैं। मैं चन्द्रमा बनकर सभी वनस्पतियों को जीवन-रस प्रदान करता हूँ।   |   mahabharat अध्याय 6.39: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 15: पुरुषोत्तम योग   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 39: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 15: पुरुषोत्तम योग  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  6.39.13 
गामाविश्य च भूतानि धारयाम्यहमोजसा ।
पुष्णामि चौषधी: सर्वा: सोमो भूत्वा रसात्मक: ॥ १३ ॥
 
 
अनुवाद
मैं प्रत्येक लोक में प्रवेश करता हूँ और मेरी शक्ति से सभी लोक अपनी कक्षा में स्थित रहते हैं। मैं चन्द्रमा बनकर सभी वनस्पतियों को जीवन-रस प्रदान करता हूँ।
 
I enter each world and by my power all the worlds remain situated in their orbit. I become the moon and provide life-juice to all plants.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)