श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 38: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 14: प्रकृति के तीन गुण  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  6.38.13 
अप्रकाशोऽप्रवृत्तिश्च प्रमादो मोह एव च ।
तमस्येतानि जायन्ते विवृद्धे कुरुनन्दन ॥ १३ ॥
 
 
अनुवाद
हे कुरुपुत्र! जब तमोगुण बढ़ता है, तो अंधकार, जड़ता, मद और आसक्ति प्रकट होती है।
 
When Tamoguna increases, O son of Kuru! Darkness, inertia, intoxication and attachment are manifested.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)