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श्री महाभारत
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पर्व 6: भीष्म पर्व
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अध्याय 38: श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 14: प्रकृति के तीन गुण
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श्लोक 11
श्लोक
6.38.11
सर्वद्वारेषु देहेऽस्मिन्प्रकाश उपजायते ।
ज्ञानं यदा तदा विद्याद्विवृद्धं सत्त्वमित्युत ॥ ११ ॥
अनुवाद
सत्व गुण का प्रकटीकरण तभी अनुभव किया जा सकता है जब शरीर के सभी द्वार ज्ञान के प्रकाश से प्रकाशित हो जाएं।
The manifestation of Satva Guna can be experienced only when all the doors of the body are illuminated by the light of knowledge.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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