Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.37.32: जो शाश्वत दृष्टि से युक्त हैं, वे देख सकते हैं कि अविनाशी आत्मा दिव्य, शाश्वत और गुणों से परे है। हे अर्जुन! स्थूल शरीर के संपर्क में रहते हुए भी आत्मा न तो कुछ करती है और न ही उसमें लिप्त होती है। | mahabharat अध्याय 6.37: श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 13: प्रकृति, पुरुष तथा चेतना । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अनादित्वान्निर्गुणत्वात्परमात्मायमव्यय: ।
शरीरस्थोऽपि कौन्तेय न करोति न लिप्यते ॥ ३२ ॥
अनुवाद
जो शाश्वत दृष्टि से युक्त हैं, वे देख सकते हैं कि अविनाशी आत्मा दिव्य, शाश्वत और गुणों से परे है। हे अर्जुन! स्थूल शरीर के संपर्क में रहते हुए भी आत्मा न तो कुछ करती है और न ही उसमें लिप्त होती है।
Those endowed with eternal vision can see that the imperishable Self is divine, eternal and beyond qualities. O Arjuna! In spite of being in contact with the physical body, the Self neither does anything nor is involved.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥