समं पश्यन्हि सर्वत्र समवस्थितमीश्वरम् ।
न हिनस्त्यात्मनात्मानं ततो याति परां गतिम् ॥ २९ ॥
अनुवाद
जो व्यक्ति ईश्वर को सर्वत्र और प्रत्येक जीव में समान रूप से विद्यमान देखता है, वह अपने मन से स्वयं को भ्रष्ट नहीं करता। इस प्रकार वह अपने दिव्य लक्ष्य को प्राप्त कर लेता है।
A person who sees God present everywhere and in every living being equally does not corrupt himself through his mind. In this way, he attains his divine destination.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥