श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 37: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 13: प्रकृति, पुरुष तथा चेतना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  6.37.19 
इति क्षेत्रं तथा ज्ञानं ज्ञेयं चोक्तं समासत: ।
मद्भ‍क्त एतद्विज्ञाय मद्भ‍ावायोपपद्यते ॥ १९ ॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार मैंने कर्मक्षेत्र (शरीर), ज्ञान और ज्ञेय का संक्षेप में वर्णन किया है। केवल मेरे भक्त ही इसे पूर्णतः समझकर मेरे स्वरूप को प्राप्त कर सकते हैं।
 
Thus I have briefly described the field of action (body), knowledge and the knowable. Only my devotees can understand this completely and thus attain my nature.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)