अविभक्तं च भूतेषु विभक्तमिव च स्थितम् ।
भूतभर्तृ च तज्ज्ञेयं ग्रसिष्णु प्रभविष्णु च ॥ १७ ॥
अनुवाद
यद्यपि परमेश्वर सभी जीवों में विभाजित प्रतीत होता है, किन्तु वह कभी विभाजित नहीं होता। वह एक ही रूप में विद्यमान रहता है। यद्यपि वह प्रत्येक जीव का रक्षक है, किन्तु यह समझना चाहिए कि वह सबका संहारक और सबको जन्म देने वाला है।
Although the Supreme Being appears to be divided among all living beings, He is never divided. He exists in one form. Although He is the preserver of every living being, it should be understood that He is the destroyer of all and the giver of birth to all.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥