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श्री महाभारत
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पर्व 6: भीष्म पर्व
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अध्याय 37: श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 13: प्रकृति, पुरुष तथा चेतना
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श्लोक 14
श्लोक
6.37.14
सर्वत: पाणिपादं तत्सर्वतोऽक्षिशिरोमुखम् ।
सर्वत:श्रुतिमल्लोके सर्वमावृत्य तिष्ठति ॥ १४ ॥
अनुवाद
उसके हाथ, पैर, आँखें, सिर, मुँह और कान सर्वत्र हैं। इस प्रकार ईश्वर सभी वस्तुओं में विद्यमान है।
His hands, feet, eyes, head, mouth and ears are everywhere. Thus God is present in all things.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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