परन्तु हे अर्जुन! इस विशाल ज्ञान की क्या आवश्यकता है? मैं अपने एक अंश मात्र से ही सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड में व्याप्त हूँ और इस प्रकार इसका स्वामी हूँ।
But, O Arjuna, what is the need for all this vast knowledge? I pervade the entire universe with just a part of myself and thus possess it.
इति श्रीमहाभारते भीष्मपर्वणि श्रीमद्भगवद्गीतापर्वणि श्रीमद्भगवद्गीतासूपनिषत्सु ब्रह्मविद्यायां योगशास्त्रे श्रीकृष्णार्जुनसंवादे विभूतियोगो नाम दशमोऽध्याय:॥ १०॥ भीष्मपर्वणि तु चतुस्त्रिंशोऽध्याय:॥ ३४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत भीष्मपर्वके श्रीमद्भगवद्गीतापर्वके अन्तर्गत ब्रह्मविद्या एवं योगशास्त्ररूप श्रीमद्भगवद्गीतोपनिषद्, श्रीकृष्णार्जुनसंवादमें विभूतियोग नामक दसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १०॥ भीष्मपर्वमें चौंतीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ३४॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥