श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 34: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 10: श्रीभगवान् का ऐश्वर्य  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  6.34.31 
पवन: पवतामस्मि राम: शस्त्रभृतामहम् ।
झषाणां मकरश्चास्मि स्रोतसामस्मि जाह्नवी ॥ ३१ ॥
 
 
अनुवाद
मैं समस्त पवित्र करने वालों में वायु हूँ, शस्त्रधारियों में राम हूँ, मछलियों में मगरमच्छ हूँ और नदियों में गंगा हूँ।
 
I am the wind among all purifiers, Rama among weapon bearers, the crocodile among fishes and Ganga among rivers.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)