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श्लोक  6.34.10 
तेषां सततयुक्तानां भजतां प्रीतिपूर्वकम् ।
ददामि बुद्धियोगं तं येन मामुपयान्ति ते ॥ १० ॥
 
 
अनुवाद
जो लोग निरंतर मेरी प्रेमपूर्वक सेवा में लगे रहते हैं, मैं उन्हें ज्ञान प्रदान करता हूँ, जिसके द्वारा वे मेरे पास आ सकते हैं।
 
To those who are constantly engaged in loving service to Me, I grant the knowledge by which they can come to Me.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)