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mahabharat 6.33.34: अपने मन को मेरा चिन्तन करने में एकाग्र करो, मेरे भक्त बनो, मुझे प्रणाम करो और मेरी पूजा करो। इस प्रकार पूर्णतः मुझमें लीन होकर तुम अवश्य ही मुझे प्राप्त करोगे।   |   mahabharat अध्याय 6.33: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 9: परम गुह्य ज्ञान   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 33: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 9: परम गुह्य ज्ञान  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  6.33.34 
मन्मना भव मद्भ‍क्तो मद्याजी मां नमस्कुरु ।
मामेवैष्यसि युक्त्वैवमात्मानं मत्परायण: ॥ ३४ ॥
 
 
अनुवाद
अपने मन को मेरा चिन्तन करने में एकाग्र करो, मेरे भक्त बनो, मुझे प्रणाम करो और मेरी पूजा करो। इस प्रकार पूर्णतः मुझमें लीन होकर तुम अवश्य ही मुझे प्राप्त करोगे।
 
Concentrate your mind on thinking about Me, become My devotee, bow to Me and worship Me. Thus, being completely absorbed in Me, you will certainly attain Me.
 
इति श्रीमहाभारते भीष्मपर्वणि श्रीमद्भगवद्‍गीतापर्वणि श्रीमद्भगवद्‍गीतासूपनिषत्सु ब्रह्मविद्यायां योगशास्त्रे श्रीकृष्णार्जुनसंवादे राजविद्याराजगुह्ययोगो नाम नवमोऽध्याय:॥ ९॥ भीष्मपर्वणि तु त्रयस्त्रिंशोऽध्याय:॥ ३३॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत भीष्मपर्वके श्रीमद्भगवद्‍गीतापर्वके अन्तर्गत ब्रह्मविद्या एवं योगशास्त्ररूप श्रीमद्भगवद्‍गीतोपनिषद्‍‍में, श्रीकृष्णार्जुनसंवादमें राजविद्याराजगुह्ययोग नामक नवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ९॥ भीष्मपर्वमें तैंतीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ३३॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)