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mahabharat 6.33.26: यदि कोई मुझे प्रेम और भक्ति से पत्र, पुष्प, फल या जल अर्पित करता है तो मैं उसे स्वीकार कर लेता हूँ।   |   mahabharat अध्याय 6.33: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 9: परम गुह्य ज्ञान   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 33: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 9: परम गुह्य ज्ञान  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  6.33.26 
पत्रं पुष्पं फलं तोयं यो मे भक्त्य‍ा प्रयच्छति ।
तदहं भक्त्य‍ुपहृतमश्न‍ामि प्रयतात्मन: ॥ २६ ॥
 
 
अनुवाद
यदि कोई मुझे प्रेम और भक्ति से पत्र, पुष्प, फल या जल अर्पित करता है तो मैं उसे स्वीकार कर लेता हूँ।
 
If someone offers me a letter, flower, fruit or water with love and devotion, I accept it.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)