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mahabharat 6.33.20: जो लोग वेदों का अध्ययन करते हैं और सोमरस का पान करते हैं, वे स्वर्ग की प्राप्ति हेतु अप्रत्यक्ष रूप से मेरी पूजा करते हैं। अपने पापों से शुद्ध होकर, वे इंद्र के पवित्र स्वर्ग में जन्म लेते हैं, जहाँ वे देवताओं के समान सुख भोगते हैं।   |   mahabharat अध्याय 6.33: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 9: परम गुह्य ज्ञान   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 33: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 9: परम गुह्य ज्ञान  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  6.33.20 
त्रैविद्या मां सोमपा: पूतपापा
यज्ञैरिष्ट्वा स्वर्गतिं प्रार्थयन्ते ।
ते पुण्यमासाद्य सुरेन्द्रलोक-
मश्न‍‍न्ति दिव्यान्दिवि देवभोगान् ॥ २० ॥
 
 
अनुवाद
जो लोग वेदों का अध्ययन करते हैं और सोमरस का पान करते हैं, वे स्वर्ग की प्राप्ति हेतु अप्रत्यक्ष रूप से मेरी पूजा करते हैं। अपने पापों से शुद्ध होकर, वे इंद्र के पवित्र स्वर्ग में जन्म लेते हैं, जहाँ वे देवताओं के समान सुख भोगते हैं।
 
Those who study the Vedas and drink the juice of Soma worship Me indirectly while seeking heaven. Purified from their sins, they are born in the holy heavenly abode of Indra, where they enjoy the bliss of the gods.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)