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पिताहमस्य जगतो माता धाता पितामह: ।
वेद्यं पवित्रम् ॐकार ऋक् साम यजुरेव च ॥ १७ ॥
अनुवाद
मैं इस जगत का पिता, माता, आश्रय और पितामह हूँ। मैं जानने योग्य, पवित्र करने वाला और ओंकार हूँ। मैं ऋग्वेद, सामवेद और यजुर्वेद भी हूँ।
I am the father, mother, shelter and grandfather of this universe. I am the knowable, purifier and Omkar. I am also the Rigveda, Samveda and Yajurveda.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥