Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 6.33.12: जो लोग इस प्रकार मोहग्रस्त होते हैं, वे आसुरी और नास्तिक विचारों की ओर आकर्षित होते हैं। इस मोहग्रस्त अवस्था में, उनकी मुक्ति की आशा, उनके सकाम कर्म और ज्ञान प्राप्ति की उनकी खोज, सभी निष्फल हो जाती हैं।   |   mahabharat अध्याय 6.33: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 9: परम गुह्य ज्ञान   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 33: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 9: परम गुह्य ज्ञान  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  6.33.12 
मोघाशा मोघकर्माणो मोघज्ञाना विचेतस: ।
राक्षसीमासुरीं चैव प्रकृतिं मोहिनीं श्रिता: ॥ १२ ॥
 
 
अनुवाद
जो लोग इस प्रकार मोहग्रस्त होते हैं, वे आसुरी और नास्तिक विचारों की ओर आकर्षित होते हैं। इस मोहग्रस्त अवस्था में, उनकी मुक्ति की आशा, उनके सकाम कर्म और ज्ञान प्राप्ति की उनकी खोज, सभी निष्फल हो जाती हैं।
 
Those who are thus bewildered are attracted to demoniac and atheistic thoughts. In this bewildered state, their hopes for liberation, their fruitive actions and their pursuit of knowledge all become fruitless.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)