श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 31: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 7: भगवद्ज्ञान  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  6.31.30 
साधिभूताधिदैवं मां साधियज्ञं च ये विदु: ।
प्रयाणकालेऽपि च मां ते विदुर्युक्तचेतस: ॥ ३० ॥
 
 
अनुवाद
जो लोग मुझ परमेश्वर को ब्रह्माण्ड, देवताओं तथा समस्त यज्ञों के नियामक के रूप में जानते हैं, वे पूर्णतः मेरी चेतना में रहते हुए भी मुझ परमेश्वर को जान और समझ सकते हैं।
 
Those who know me, the Supreme Lord, as the controller of the universe, of the gods and of all sacrificial rituals, while living in full consciousness of me, can know and understand me, the Lord, even at the time of their death.
 
इति श्रीमहाभारते भीष्मपर्वणि श्रीमद्भगवद्‍गीतापर्वणि श्रीमद्भगवद्‍गीतासूपनिषत्सु ब्रह्मविद्यायां योगशास्त्रे श्रीकृष्णार्जुनसंवादे ज्ञानविज्ञानयोगो नाम सप्तमोऽध्याय:॥ ७॥ भीष्मपर्वणि तु एकत्रिंशोऽध्याय:॥ ३१॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत भीष्मपर्वके श्रीमद्भगवद्‍गीतापर्वके अन्तर्गत ब्रह्मविद्या एवं योगशास्त्ररूप श्रीमद्भगवद्‍गीतोपनिषद्, श्रीकृष्णार्जुनसंवादमें ज्ञान-विज्ञानयोग नामक सातवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ७॥ भीष्मपर्वमें इकतीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ३१॥

 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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