Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.30.5: मनुष्य को अपने मन की सहायता से स्वयं को ऊपर उठाना चाहिए और स्वयं को नीचे नहीं गिरने देना चाहिए। यह मन बद्धजीव का मित्र भी है और शत्रु भी। | mahabharat अध्याय 6.30: श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 6: ध्यानयोग । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उद्धरेदात्मनात्मानं नात्मानमवसादयेत् ।
आत्मैव ह्यात्मनो बन्धुरात्मैव रिपुरात्मन: ॥ ५ ॥
अनुवाद
मनुष्य को अपने मन की सहायता से स्वयं को ऊपर उठाना चाहिए और स्वयं को नीचे नहीं गिरने देना चाहिए। यह मन बद्धजीव का मित्र भी है और शत्रु भी।
A man should uplift himself with the help of his mind and not allow himself to fall down. This mind is both a friend and an enemy of the conditioned soul.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥