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श्लोक 6.30.40  |
श्रीभगवानुवाच
पार्थ नैवेह नामुत्र विनाशस्तस्य विद्यते ।
न हि कल्याणकृत्कश्चिद्दुर्गतिं तात गच्छति ॥ ४० ॥ |
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| अनुवाद |
| भगवान बोले- हे पृथापुत्र! कल्याणकारी कार्यों में संलग्न योगी का न तो इस लोक में नाश होता है और न ही परलोक में। हे मित्र! जो मनुष्य भलाई करता है, वह कभी भी बुराई से पराजित नहीं होता। |
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| God said- O son of Pritha! A Yogi who is engaged in welfare activities is neither destroyed in this world nor in the next. O friend! A person who does good is never defeated by evil. |
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