श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 30: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 6: ध्यानयोग  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  6.30.40 
श्रीभगवानुवाच
पार्थ नैवेह नामुत्र विनाशस्तस्य विद्यते ।
न हि कल्याणकृत्कश्चिद्दुर्गतिं तात गच्छति ॥ ४० ॥
 
 
अनुवाद
भगवान बोले- हे पृथापुत्र! कल्याणकारी कार्यों में संलग्न योगी का न तो इस लोक में नाश होता है और न ही परलोक में। हे मित्र! जो मनुष्य भलाई करता है, वह कभी भी बुराई से पराजित नहीं होता।
 
God said- O son of Pritha! A Yogi who is engaged in welfare activities is neither destroyed in this world nor in the next. O friend! A person who does good is never defeated by evil.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd