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यदा हि नेन्द्रियार्थेषु न कर्मस्वनुषज्जते ।
सर्वसङ्कल्पसन्न्यासी योगारूढस्तदोच्यते ॥ ४ ॥
अनुवाद
जब कोई व्यक्ति सभी भौतिक इच्छाओं का त्याग कर देता है और न तो इंद्रिय संतुष्टि के लिए काम करता है और न ही सकाम कार्यों में लिप्त होता है, तो उसे योगारूढ़ कहा जाता है।
When a person renounces all material desires and neither works for sense gratification nor indulges in fruitive activities, he is said to be in Yogarudha.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥