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mahabharat 6.30.4: जब कोई व्यक्ति सभी भौतिक इच्छाओं का त्याग कर देता है और न तो इंद्रिय संतुष्टि के लिए काम करता है और न ही सकाम कार्यों में लिप्त होता है, तो उसे योगारूढ़ कहा जाता है।   |   mahabharat अध्याय 6.30: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 6: ध्यानयोग   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.30.4 
यदा हि नेन्द्रियार्थेषु न कर्मस्वनुषज्ज‍ते ।
सर्वसङ्कल्पसन्न्यासी योगारूढस्तदोच्यते ॥ ४ ॥
 
 
अनुवाद
जब कोई व्यक्ति सभी भौतिक इच्छाओं का त्याग कर देता है और न तो इंद्रिय संतुष्टि के लिए काम करता है और न ही सकाम कार्यों में लिप्त होता है, तो उसे योगारूढ़ कहा जाता है।
 
When a person renounces all material desires and neither works for sense gratification nor indulges in fruitive activities, he is said to be in Yogarudha.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)