श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 30: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 6: ध्यानयोग  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  6.30.33 
अर्जुन उवाच
योऽयं योगस्त्वया प्रोक्त: साम्येन मधुसूदन ।
एतस्याहं न पश्यामि चञ्चलत्वात्स्थितिं स्थिराम् ॥ ३३ ॥
 
 
अनुवाद
अर्जुन बोले, "हे मधुसूदन! आपने जिस योग-पद्धति का संक्षेप में वर्णन किया है, वह मेरे लिए अव्यावहारिक एवं असहनीय है, क्योंकि मेरा मन चंचल एवं अस्थिर है।"
 
Arjun said, "O Madhusudan! The Yoga system which you have briefly described is impractical and unbearable for me because my mind is fickle and unstable."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)