|
| |
| |
श्लोक 6.30.29  |
सर्वभूतस्थमात्मानं सर्वभूतानि चात्मनि ।
ईक्षते योगयुक्तात्मा सर्वत्र समदर्शन: ॥ २९ ॥ |
| |
| |
| अनुवाद |
| सच्चा योगी मुझे सभी प्राणियों में और सभी प्राणियों को मुझमें देखता है। आत्म-साक्षात्कार की अवस्था प्राप्त करने वाला व्यक्ति निश्चय ही मुझ परमेश्वर को सर्वत्र देखता है। |
| |
| A true Yogi sees Me in all beings and all beings in Me. A person who has attained the state of self-realization certainly sees Me, the Supreme Lord, everywhere. |
| ✨ ai-generated |
| |
|