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mahabharat 6.30.29: सच्चा योगी मुझे सभी प्राणियों में और सभी प्राणियों को मुझमें देखता है। आत्म-साक्षात्कार की अवस्था प्राप्त करने वाला व्यक्ति निश्चय ही मुझ परमेश्वर को सर्वत्र देखता है।   |   mahabharat अध्याय 6.30: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 6: ध्यानयोग   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.30.29 
सर्वभूतस्थमात्मानं सर्वभूतानि चात्मनि ।
ईक्षते योगयुक्तात्मा सर्वत्र समदर्शन: ॥ २९ ॥
 
 
अनुवाद
सच्चा योगी मुझे सभी प्राणियों में और सभी प्राणियों को मुझमें देखता है। आत्म-साक्षात्कार की अवस्था प्राप्त करने वाला व्यक्ति निश्चय ही मुझ परमेश्वर को सर्वत्र देखता है।
 
A true Yogi sees Me in all beings and all beings in Me. A person who has attained the state of self-realization certainly sees Me, the Supreme Lord, everywhere.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)