श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 30: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 6: ध्यानयोग  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  6.30.19 
यथा दीपो निवातस्थो नेङ्गते सोपमा स्मृता ।
योगिनो यतचित्तस्य युञ्जतो योगमात्मन: ॥ १९ ॥
 
 
अनुवाद
जिस प्रकार वायुरहित स्थान में दीपक नहीं हिलता, उसी प्रकार मन को वश में रखने वाला योगी सदैव आत्मा के ध्यान में स्थिर रहता है।
 
Just as a lamp does not move in an airless place, similarly a yogi who has his mind under control, always remains steady in meditation on the Self.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)