Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.3.71: जिस पक्ष के योद्धा शत्रु की सेना में प्रवेश करते समय या प्रवेश करने के पश्चात् इच्छित वचन (मैं तुम्हें तुरंत मार डालूँगा आदि वीरतापूर्ण वचन) बोलते हैं और अपना युद्ध कौशल प्रदर्शित करते हैं, वे भविष्य में अपनी विजय पहले ही सुनिश्चित कर लेते हैं। इसके विपरीत जो शत्रु की सेना में प्रवेश करते समय सामने से निषेध वचन सुनते हैं, वे पराजित हो जाते हैं॥ 71॥ | mahabharat अध्याय 6.3: व्यासजीके द्वारा अमंगलसूचक उत्पातों तथा विजयसूचक लक्षणोंका वर्णन । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इष्टा वाच: प्रविष्टस्य दक्षिणा: प्रविविक्षत:।
पश्चात् संधारयन्त्यर्थमग्रे च प्रतिषेधिका:॥ ७१॥
अनुवाद
जिस पक्ष के योद्धा शत्रु की सेना में प्रवेश करते समय या प्रवेश करने के पश्चात् इच्छित वचन (मैं तुम्हें तुरंत मार डालूँगा आदि वीरतापूर्ण वचन) बोलते हैं और अपना युद्ध कौशल प्रदर्शित करते हैं, वे भविष्य में अपनी विजय पहले ही सुनिश्चित कर लेते हैं। इसके विपरीत जो शत्रु की सेना में प्रवेश करते समय सामने से निषेध वचन सुनते हैं, वे पराजित हो जाते हैं॥ 71॥
The side whose warriors, while wishing to enter the enemy's army or after entering it, speak the desired words (I will kill you immediately and other brave words) and display their war skills, they already ensure their victory in the future. On the contrary, those who hear words of prohibition from the front while entering the enemy's army, are defeated.॥ 71॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥