श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 3: व्यासजीके द्वारा अमंगलसूचक उत्पातों तथा विजयसूचक लक्षणोंका वर्णन  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  6.3.23 
पृथिवी शोणितावर्ता ध्वजोडुपसमाकुला।
कुरूणां वैशसे राजन् पाण्डवै: सह भारत॥ २३॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! हे भरतपुत्र! जब कौरवों और पाण्डवों का भयंकर युद्ध आरम्भ होगा, तब पृथ्वी पर रक्त की नदियाँ बहेंगी, उनमें रक्त के भँवर उठेंगे और रथों की ध्वजाएँ उन नदियों पर छोटी-छोटी नावों के समान फैली हुई दिखाई देंगी॥ 23॥
 
O King! O son of Bharat! When the violent war between the Kauravas and the Pandavas will commence, rivers of blood will flow on the earth, whirlpools of blood will rise in them and the flags of the chariots will be seen spread all over like small boats on those rivers.॥ 23॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd