Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.3.14: मंगल मघा नक्षत्र में वक्री है, बृहस्पति श्रवण नक्षत्र में विराजमान है और सूर्यपुत्र शनि पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में पहुँचकर उसे कष्ट दे रहा है॥14॥ | mahabharat अध्याय 6.3: व्यासजीके द्वारा अमंगलसूचक उत्पातों तथा विजयसूचक लक्षणोंका वर्णन । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मघास्वङ्गारको वक्र: श्रवणे च बृहस्पति:।
भगं नक्षत्रमाक्रम्य सूर्यपुत्रेण पीडॺते॥ १४॥
अनुवाद
मंगल मघा नक्षत्र में वक्री है, बृहस्पति श्रवण नक्षत्र में विराजमान है और सूर्यपुत्र शनि पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में पहुँचकर उसे कष्ट दे रहा है॥14॥
Mars is retrograde in the Magha constellation, Jupiter is seated in the Shravan constellation and Saturn, the son of the Sun, has reached the Purva Phalguni constellation and is troubling it.॥ 14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥