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श्री महाभारत
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पर्व 6: भीष्म पर्व
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अध्याय 28: श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 4: दिव्य ज्ञान
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श्लोक 8
श्लोक
6.28.8
परित्राणाय साधुनां विनाशाय च दुष्कृताम् ।
धर्मसंस्थानार्थाय सम्भवामि युगे युगे ॥ ८ ॥
अनुवाद
मैं भक्तों का उद्धार करने, दुष्टों का विनाश करने तथा धर्म की पुनः स्थापना करने के लिए प्रत्येक युग में अवतरित होता हूँ।
I appear in every age to rescue the devotees, destroy the wicked and re-establish Dharma.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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