श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 28: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 4: दिव्य ज्ञान  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  6.28.2 
एवं परम्पराप्राप्तमिमं राजर्षयो विदुः ।
स कालेनेह महता योगे नष्टः परन्तप ॥ २ ॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार यह सर्वोच्च विज्ञान गुरु परंपरा के माध्यम से प्राप्त हुआ और राजाओं ने इसी विधि से इसे समझा। किन्तु कालान्तर में यह परंपरा टूट गई और इस प्रकार यह विज्ञान अपने मूल स्वरूप में लुप्त हो गया।
 
Thus, this supreme science was attained through the tradition of Gurus and the kings understood it through this method. But over time, this tradition was broken and hence, this science seems to have disappeared in its original form.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)