श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 26: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 2: गीता का सार  »  श्लोक 68
 
 
श्लोक  6.26.68 
तस्माद्यस्य महाबाहो निगृहीतानि सर्वशः ।
इन्द्रियाणीन्द्रियार्थेभ्यस्तस्य प्रज्ञा प्रतिष्ठिता ॥ ६८ ॥
 
 
अनुवाद
अतः हे महाबाहो! जिस पुरुष की इन्द्रियाँ अपने-अपने विषयों से पूर्णतया विरक्त होकर उसके वश में रहती हैं, उसकी बुद्धि निस्संदेह स्थिर रहती है।
 
Therefore, O mighty-armed one, the person whose senses are completely detached from their respective objects and are under his control, his intellect is undoubtedly stable.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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