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mahabharat 6.26.67: जिस प्रकार पानी पर तैरती हुई नाव तेज हवा के कारण बह जाती है, उसी प्रकार मन जिस पर निरन्तर केन्द्रित रहता है, वह इंद्रियों में से किसी एक पर भी मनुष्य की बुद्धि का हरण हो जाता है।   |   mahabharat अध्याय 6.26: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 2: गीता का सार   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.26.67 
इन्द्रियाणां हि चरतां यन्मनोऽनुविधीयते ।
तदस्य हरति प्रज्ञां वायुर्नावमिवाम्भसि ॥ ६७ ॥
 
 
अनुवाद
जिस प्रकार पानी पर तैरती हुई नाव तेज हवा के कारण बह जाती है, उसी प्रकार मन जिस पर निरन्तर केन्द्रित रहता है, वह इंद्रियों में से किसी एक पर भी मनुष्य की बुद्धि का हरण हो जाता है।
 
Just as a boat floating on water is swept away by a strong wind, so too any one of the wandering senses on which the mind is constantly focused takes away a person's intelligence.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)