श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 26: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 2: गीता का सार  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  6.26.54 
अर्जुन उवाच
स्थितप्रज्ञस्य का भाषा समाधिस्थस्य केशव ।
स्थितधीः किं प्रभाषेत किमासीत व्रजेत किम् ॥ ५४ ॥
 
 
अनुवाद
अर्जुन बोले - हे कृष्ण! स्थितप्रज्ञ पुरुष के क्या लक्षण होते हैं? वह कैसे बोलता है, उसकी भाषा क्या है? वह कैसे बैठता और चलता है?
 
Arjun said—O Krishna! What are the characteristics of a person absorbed in spirituality (Sthitaprajna)? How does he speak and what is his language? How does he sit and walk?
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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