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mahabharat 6.26.33: लेकिन यदि आप युद्ध लड़ने के अपने स्वधर्म को पूरा नहीं करते हैं, तो आप निश्चित रूप से अपने कर्तव्य की उपेक्षा के दोषी होंगे और आप एक योद्धा के रूप में अपनी प्रसिद्धि भी खो देंगे।   |   mahabharat अध्याय 6.26: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 2: गीता का सार   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 26: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 2: गीता का सार  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  6.26.33 
अथ चेत्त्वमिमं धर्म्यं सङ्ग्रामं न करिष्यसि ।
ततः स्वधर्मं कीर्तिं च हित्वा पापमवाप्स्यसि ॥ ३३ ॥
 
 
अनुवाद
लेकिन यदि आप युद्ध लड़ने के अपने स्वधर्म को पूरा नहीं करते हैं, तो आप निश्चित रूप से अपने कर्तव्य की उपेक्षा के दोषी होंगे और आप एक योद्धा के रूप में अपनी प्रसिद्धि भी खो देंगे।
 
But if you do not fulfill your swadharma of fighting a war, you will certainly be guilty of neglecting your duty and you will also lose your fame as a warrior.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)